Thursday, December 28, 2006

साल का खिताबी किस्सा

साल के अंत में खिताब बांटने की परंपरा रही है। मतलब ई कि साल का सबसे बढ़िया कौन, सबसे घटिया कौन, सबसे बेसी काम लायक कौन, सबसे कम काम लायक कौन... जैसन तमाम खिताब दिसंबर में बांटा जाता है। ऐसन में हमने भी कुछ खिताब बांटने का फैसला किया, आइए उसके बारे में आपको बताता हूं।

एक ठो सरकारी संगठन है 'नेशनल नॉलेज कमिशन'। इस साल का 'सबसे बड़ा मजाक' इसी संगठन के साथ हुआ। हमरे खयाल से किसी ने जमकर जब भांग पिया होगा, तभिए उसको ऐसन संगठन बनाने की 'बदमाशी' सूझी होगी। नहीं, तो आप ही बताइए न, आरक्षण के जमाने में ऐसन संगठन बनाना जनता के साथ 'मूर्ख दिवस' मनाना ही तो है। बेचारे 'ज्ञानी आदमी' सैम पित्रोदा पछता रहे होंगे कि इसका मुखिया बनकर कहां फंस गया!

वैसे, हमरे एक दोस्त का कहना है कि फंस तो पराइम मिनिस्टर बनकर मनमोहन सिंह भी गए हैं औरो इस साल का 'सबसे बड़का चुटकुला' यही हो सकता है कि मनमोहन सिंह पराइम मिनिस्टर हैं। उसके अनुसार, इस पोस्ट के साथ ऐसी दुर्घटना कभियो नहीं घटी, जैसन कि इस साल घटी है। का है कि परधानमंतरी तो मनमोहन हैं, लेकिन सरकार का सारा काम हुआ सोनिया गांधी के कहने पर। ऐसन में मनमोहन के अभियो परधान मंतरी पद पर टिके रहने को 'साल की सबसे बड़ी दुर्घटना' मानी जा सकती है।

लेकिन, हमरे खयाल से पराइम मिनिस्टर के साथ हुए इस 'दुर्घटना' को हम बहुत बड़ा नहीं मान सकते, काहे कि हमरे खयाल से 'साल की सबसे बड़ी दुर्घटना' मुंबई के डांस बारों पर लगा प्रतिबंध है। ऊ इसलिए, काहे कि जैसे परमाणु बम फूटने के बाद विकिरण फैलता है, वैसने मुंबई में प्रतिबंध लगने के बाद वहां की बार डांसर पूरे देश में फैल गईं औरो गंध मचा रही हैं। दिल्ली से लेकर झारखंड के नेता तक उनसे अपनी महफिल सजा रहे हैं, तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक के कोठा पर 'मुंबइया माल' पर लोग अपना माल लुटा रहे हैं। इससे बड़ी दुर्घटना और का हो सकती है? यानी आप कह सकते हैं कि इस साल का 'सबसे बड़ा अपराध' महाराष्ट्र के होम मिनिस्टर आर आर पाटिल ने किया है। काहे कि उन्हीं की जिद के कारण बार डांसर का ई 'विस्फोट' हुआ औरो देश परदूषित हुआ।

वैसे, इसका मतलब ई कतई नहीं है कि पाटिल को 'साल के सबसे बड़े जिद्दी' का खिताब दे दिया जाए। इस पर तो पूरा हक सौरव गंग्गुली का है। का है कि ऐसन तपस्या तो सीता जी ने राम जी को पाने के लिए भी नहीं किया था, जैसन गंग्गुली ने इस साल टीम में वापसी के लिए किया है।

अगर सबसे बड़े जिद्दी सौरव दादा हैं, तो का 'साल का सबसे बड़ा पिद्दी' ग्रेग चैपल को मान लिया जाए? आप कहें, तो हम ऐसा मान सकता हूं, काहे कि जिस आदमी को आपने चूहा मानकर निकाल दिया था, ऊ अगर शेर बनकर फिर से आप पर दहाड़ने लगे, तो नि:संदेह आप पिद्दी ही हैं! वैसे, पिद्दी होने का मतलब ई कतई नहीं है कि 'इस साल का जीरो' भी चैपल ही होंगे, काहे कि इस लाइन में किरण मोरे जैसन बहुते लोग हैं। लेकिन इस खिताब पर हमरे खयाल से सबसे पहला अधिकार सरकार का है, काहे कि साल में सबसे बेसी फजीहत उसी की हुई है। कोयो उसको पूछ नहीं रहा, सब अपनी मर्जी कर रहे हैं। आपको साल भर कभियो लगा कि इस देश में सरकारो नामक कोयो चीज है भी?

सरकार के इसी निकम्मेपन के चलते 'साल का सबसे बड़ा हीरो' का खिताब न्यायपालिका को दिया जा सकता है। काहे कि अगर इस साल कोर्ट इतना एक्टिव नहीं होता, तो इस देश का भगवाने मालिक था। कोर्ट नहीं रहता, तो नोट-वोट के चक्कर में तो नेता औरो अफसर सब इस देश को डुबाइए न देते!
तो ई है खिताबों की लिस्ट और उनके हकदारों के नाम। लेकिन अभी ई फाइनल नहीं है, काहे कि सिफारिशी लालों के इस देश में अभियो हम सिफारिश पर गौर करने को तैयार हूं।

3 comments:

सागर चन्द नाहर said...

मेरी सूचि के हिसाब से इस साल के सबसे अच्छे हिन्दी चिठ्ठाकारों के अगर पाँच नाम लिये जाये तो पहले नं पर चुने जाने वालों में एक नाम आपका भी है, (दूसरा तो मैं हूँ ही) हा हा हा
नये साल की अग्रिम बधाई और आशा है अगले साल भी आपके व्यंग बाण इसी तरह चलते रहेंगे :)

श्रीश । ई-पंडित said...

वाह साल का मजेदार लेखा-जोखा बनाया आपने।

Priya Ranjan Jha said...

धन्यवाद नाहर जी

लीजिए आपने तो नए साल का अवॉर्ड हमें दे दिया पहले नं. का चिट्ठाकार कहकर. आप लोगों का स्नेह ही उत्साह बनाए रखता है और प्रेरणा देता है.
आपको और सभी को नए साल की बहुत बहुत शुभकामनाएं.