Friday, March 23, 2007

आप तो झूठ्ठे सेंटिया गए...

हो गया न, जिसका हमको डर था। हम पहिलिये न कहते थे वूल्मर जी आपसे कि बेकार का मगजमारी करने यहां मत आइए, लेकिन आप थे कि मानने को तैयारे नहीं थे। पता नहीं आपको ई कैसे लगता था कि पाकिस्तान में प्रतिभा की कमी नहीं है, बस तराशने वाला चाहिए, ऊ विश्वविजेता बन जाएगा। अरे भाई साहब, ई भारत- पाकिस्तान है, इनको भगवानो नहीं सुधार सकता, फिर आप तो साधारण इनसान थे। विश्वास नहीं था, तो अपने बिरादर चैपल भैय्या से पूछ लेते कि प्रोफेशनलिज्म दिखाना इस इलाके में केतना खतरनाक होता है।

दू साल हो गए, बेचारे चैपल बाबू एको ठो युवा प्रतिभा नहीं तलाश सके। औरो भारत अभियो उसी सचिन, द्रविड़, गांगुली व कुंबले के भरोसे विश्व कप जीतने की फिराक में है, जिनको उन्होंने बूढ़ा घोषित कर दिया था। आपको का लगता है कि भारत में प्रतिभा की कमी है? जी नहीं, प्रतिभा की यहां कौनो कमी नहीं है, दिक्कत बस ई है कि यहां उसको पनपने नहीं दिया जाता। प्रतिभा यहां कुछ लोगों की बपौती होती है औरो उनके बिना भी किसी का काम चल जाए, यह उनको गंवारा नहीं। अब देखिए न उस नेताजी को, राजनीति के मैदान में उसका अभी दूध का दांतों नहीं टूटा है, लेकिन दावा ई है कि भारत की धर्मनिरपेक्षता बस उसी के खानदान की बपौती है। यानी आप इहो कह सकते हैं कि बस उसी के खानदान को देश चलाने की तमीज है! यही हाल आपके इंजमाम औरो युनुस जैसन चेलवा का भी है। अब ऐसन मानसिकता वाले देशों में अगर आप प्रोफेशनलिज्म दिखाइएगा, तो सीधे ऊपरे न पहुंच जाइएगा।

ठीक है कि टीम को बढि़या परदरशन करना चाहिए, लेकिन हारने के बाद आपको एतना सेंटियाने किसने कहा था? ई भारतीय उपमहाद्वीप है, यहां सरवाइव करना है, तो काम से मतलब कम रखिए औरो पोलिटिक्स बेसी कीजिए। आपके जैसन लोग, जो यहां बेसी प्रोफेशनलिज्म दिखाते हैं, सबको ऊपर का ही रास्ता चुनना पड़ता है, फिर चाहे ऊ हमरा दफ्तर हो या परधानमंतरी कार्यालय। यहां काम खराब कर शरमाने औरो सिर छुपाने की जरूरत नहीं पड़ती, बस गोटी बढि़या से फिट कीजिए, फिर देखिए आपको कोसने वाला शरमाकर खुदे छुप जाएगा।

अब देखिए न, हमारे देश में हुए एक सर्वे का कहना है कि यहां 79 प्रतिशत लोग नेताओं से नफरत करते हैं! आप ही कहिए, अगर सर्वे पढ़कर यहां का नेता सब शरमाने लगे, तो देश में राजनीतिए न बंद हो जाएगी। इसीलिए तो यहां कोई शरमाता नहीं औरो काम खराबकर सुसाइड करने के बारे में तो कोयो सोच भी नहीं सकता, उल्टे दूसरे पर दोष थोपना यहां बहादुरी का काम माना जाता है।

बढि़या तो ई होता कि पाकिस्तान में किसी आका बनने की चाह रखने वाले को आप अपना काका बना लेते औरो इंजमाम को बलि का बकरा बनाकर अपनी चमड़ी बचा लेते! हमको लगता है कि आप यही मात खा गए, राजनीति करना कभी सीखबे नहीं किए। अब का कीजिएगा, राजनीति छोड़कर प्रोफेशनलिज्म दिखाइएगा, तो यही होगा। तो हमरी मानिए, अगला जनम आप इसी भारतीय उपमहाद्वीप में लीजिए, देखिएगा एतना तुच्छ कारणों से आपको दुनिया छोड़ने की नौबते नहीं आएगी!

5 comments:

Srijan Shilpi said...

बहुत खूब! तोहार एसने शैली के त हमहूं कायल हूं।

संजय बेंगाणी said...

अच्छा लिखा भाई, मगर हमे पहले दिन से लग रहा था की मामला सेंटियाने का नहीं है. व्लमर मरे नहीं, मारे गए है. मैच फिक्सिंग का मामला लग रहा था. अब सत्य क्या है, बाहर आने पर पता चलेगा.

Udan Tashtari said...

बहुत सही!!

पद्मनाभ मिश्र said...

प्रिय झा जी,

अपनेक ब्लोग पढ़ि के मस्त भऽ गेलहुँ. मुदा एकेटा चिन्ता सताबैत अछि. साढ़े चारि करोड़ मैथिल आा मैथिली भाषा'क ब्लोगक दुनियाँ सँ अनुपस्थिति. अपने सँ आग्रह जे मैथिली'यो मे लिखि. हम सब किछु लोक मिलिकेँ एहने प्रयासa कयने छी. आओर अपने सँ एहि मे सक्रिय योगदान'क अपेक्षा राखैत छी. मैथिली भाषा'क ब्लोग

प्रियंकर said...

ई इंडियन सब-कॉन्टीनेंट में रहिएगा अउर सैटिंग-सैटिंग नहीं खेलिएगा, बस पिरोफ़ेसनलिज्म बघारिएगा तो इहै होगा . अब का बताएं इहां अतना दिन रहे पर कुच्छौ नाहीं सीखबे किये . तो मरो अब . हम भी दो मिनट का मौन रख देंगे . अउर का!