Saturday, September 08, 2007

चैनल वाले बाबा

मिसिर जी ने टीवी देखकर अपनी मेहरारू को बुलाया। चैनलों पर सरौते वाले बाबा का आशरम दिखाया जा रहा था। चप्पलों का ढेर, घायलों की लाइन, लोगों का हुजूम... मिसिर जी ने मेहरारू को 'कल तक' चैनल दिखाया। वहां का अल्टरा-मॉड एंकर चीख-चीख कर इस कांड के लिए मध्य परदेश सरकार को कोस रहा था। ऊ वहां के एसपी से पूछ रहा था कि बाबा पर आईपीसी का कौन-कौन धारा लग सकता है कि ऊ जेल में सड़ जाए।

एंकर की बात सुन मिसिर जी का मन भन्ना गया, 'सबसे पहले तो तुम्ही पर आईपीसी की सब धारा लगा दी जानी चाहिए कि चैनल बंद हो जाए। पांच दिन पहले तुम्ही तो अपने चैनल पर सरौते वाले बाबा का गुणगान कर रहे थे, अब घडियाल जैसे रो क्यों रहे हो?' मिसिर जी का तो मन कर रहा था कि टीवी से खींच कर झुठ्ठे एंकर को पटक दे, लेकिन हकीकत में ऐसा ऊ ऐसा कर नहीं सकते थे, सो मन मसोस कर रह गए।

एंकर से फारिग हो मिसिर जी ने मेहरारू की खबर ली, 'देख लीजिए नजारा... पूरी दुनिया के हस्पताल के डाकडर मर गए, जो आप इलाज के लिए इस बाबा से अपनी आंख में सरौता डलवाना चाहती थीं। हम तो पहले ही कह रहे थे न कि ई चैनल वाले लोगों को बरगलाते हैं... बाबाओं से इनकी सेटिंग है...।'

ई कहते-कहते मिसिर जी ने रिमोट दबाकर चैनल आगे बढ़ाया। अब टीवी पर 'जी-वन टीवी' चैनल चल रहा था। एक मोटा-सा थुलथुल रिपोर्टर नदी किनारे बने श्मशान में एक बाबा के चरण छू रहा था। मेहरारू ने मिसिर जी को टोका, 'देखिए, देखिए... कैसे इत्ते बड़े चैनल का पतरकार बाबा के चरण धोकर पी रहा है औरो आप कहते हैं कि बाबा ढोंगी है।' मिसिर जी देगी मिरिच जैसन लाल हो गए, 'उसको चैनल का मालिक बाबाओं के चरण धोकर पीने के लिए ही तनखा देता है, तो ऊ पीएगा ही।' मिसिर जी अभी भी रुके नहीं थे, 'मिसराइन जैसन लोगों को मूरख बनाने के लिए पता नहीं चैनल वालों को का का करना पड़ता है... बेचारे चैनल वाले!'

अभी मिसिर जी की बात समाप्त भी नहीं हुई थी कि उनका बड़का बेटा आ गया, 'पापा पापा... हम संजय दत्त वाली माता जी का मंदिर देखने कब जाएंगे? मम्मी कह रही थीं कि उसके बाद हम लोग अमिताभ बच्चन वाले भगवान जी के मंदिर भी देखने जाएंगे।'

बेटे का गप्प सुनकर मिसिर जी ने अपना माथा पकड़ लिया। अब वह सुपुत्र के कोड वर्ड को डीकोड कर रहे थे, 'संजय दत्त वाली माता जी का मंदिर... मतलब वैष्णो देवी का मंदिर औरो अमिताभ बच्चन वाले भगवान के मंदिर... मतलब सिद्धि विनायक मंदिर, बालाजी मंदिर, अक्षरधाम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर...।'

मिसिर जी का सिर दुखने लगा था। उन्हें भगवान पर तरस आने लगा, 'अमिताभ बच्चन वाले भगवान का मंदिर... संजय दत्त वाली माता जी का मंदिर... बताइए ई है चैनल की माया। इन चैनल वालों की किरपा से भगवानो की औकात कम हो गई। वैष्णो देवी की अपनी ख्याति कम थी कि संजय दत्त उनका बरांड एम्बेसेडर बन गया औरो मेरा छोटुआ उनको संजय दत्त की माता जी बता रहा है...।'

मिसिर जीं का मन कर रहा था कि उ टीवी को फोड़ दे लेकिन उ रुक गए. आख़िर जिस चीज ने भगवान की औकात कम कर दी ओरो बाबाओं की बढ़ा दी उससे भला कोयो कैसे पंगा ले सकता है!

2 comments:

संजय तिवारी said...

आपकी भाषा पढकर मजा आ गया. देशज शब्दों का बड़ी खूबसूरती से प्रयोग किया है आपने. एक बार भी अखरता नहीं है.

Basant Arya said...

बात कहने का तरीका ऐसे जैए दाल मे तडका लगा कर परोसा जा रहा हो.मस्त गुरू मस्त.