Saturday, May 03, 2008

बहुते जालिम है दुनिया

दुनिया बहुते जालिम है। आप कुछो नहीं कीजिए, तो उसको पिराबलम, कुछो करने लगिए, तभियो पिराबलम! आखिर दुनिया को चाहिए का, कोयो नहीं जानता। औरो जब तक जानने की स्थिति में होता है, बरबाद हो चुका होता है।

जब तक आम भारतीयों को दोनों टैम रोटी-नून नहीं मिलता था, गरीब देश कह-कहके पश्चिमी देशों ने उसके नाक में दम कर रख था। अब जाके स्थिति सुधरी औरो कुछ लोग भरपेट खाना खाने लगे, तो अब फिर से अमेरिका के पेट में दरद की शिकायत हो गई है। अब अमेरिकी विदेश मंतरी कहने लगी हैं कि भारतीय एतना भुक्खड़ हैं कि टन का टन अन्न चट कर जाते हैं। ऊ एतना खाते हैं कि दुनिया से अन्न खतम होने लगा है। गनीमत है, अभी तक अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में भारतीयों को एक शाम उपवास पर रखने का बिल नहीं पास करवाया है। का पता एक दिन ऐसनो दिन देखना पड़े, आखिर ऊ महाशक्ति है भाई।

हालांकि, गनीमत तो इहो है कि अभी तक उनको भारत में आदमियों के पैदावार पर बेसी आपत्ति नहीं है! जिस दिन उसको आपत्ति हो जाएगी, यकीन मानिए भारत सरकार उसके आदेश का वैसने खयाल रखेगी जैसन उसने चीनी ओलिंपिक मशाल का रखा। एक दिन में सबकी नसबंदी हो जाएगी औरो अरब तक जनसंख्या पहुंचा देने वाला 'भारतीय कुटीर उद्योग' पूरी तरह बंद हो जाएगा!

वैसे, भारत की गरीबी का मजाक उड़ाने में अमेरिकिए आगे नहीं है। अभिये कुछ दिन पहिले एक ठो केंद्रीय मंतरी ने कहा कि चूंकि उत्तर भारतीय भी अब गेहूं खाने लगे हैं, इसलिए देश में अन्न की कमी हो गई है। अब बताइए, उत्तर भारतीयों को रोटी खाना बंद कर देना चाहिए?

दुनिया के सताए लोग और भी हैं। बेचारे हरभजन सिंह को ही लीजिए। दुनिया ने बेचारे को कहीं का नहीं छोड़ा। पहले तो दुनिया उसको झाड़ पर चढ़ाती रही कि बोलर को एग्रेसिव होबे करना चाहिए, उसे साइमंड्स की ऐसी तैसी करनी ही चाहिए। औरो ऑस्ट्रेलिया में बहादुरी दिखाने के बाद जब उस बेचारे ने आईपीएल में श्रीशांत को लपड़ा दिया, तो उसकी 'बहादुरी' को दाद देने वाला कोयो नहीं था। आज सब उसके एग्रेसन की आलोचना कर रहे हैं। बेचारा भज्जी!

कुछ ऐसने हाल किया है दुनिया ने करीना कपूर का भी। जब तक ऊ शाहिद कपूर के साथ थी, बेचारी को दुनिया ने चैन से जीने नहीं दिया। लोग कहते थे कि चालाक करीना एक 'मासूम' का शोषण कर रही है। बेचारी ने जब उस 'बाल शोषण' से तौबा करनी चाही, तो सहारे के लिए कंधा भी तलाशा। अब कोयो हमउमर वैसन मिलेगा नहीं, तो बुड्ढे हो रहे सैफ का ही सहारा ढूंढ लिया। अब दुनिया को फिर से करीना से ऐतराज है- नैन मटक्का भी कर रही है तो तलाकशुदा दो बच्चे के बाप से। अब दुनिया करीना से पूछ रही है कि सैफ में आखिर उसको मिला का?

हालत तो खराब लोगों की ऑफिस की दुनिया भी कर रही है। कान्फिडेंस नहीं है... काम नहीं कर सकते... जैसन ताना सुनते सुनते बंदा जब अपने में ओवर कान्फिडेंस पैदा कर लेता है, तो बाकियों को लगता है कि ई तो कुछ बेसिए उड़ रहा है। फिर लगते हैं सब उसका पर कतरने, ताकि ऊ उड़िए न पाए। बेचारे चौबे, जो छब्बे बनने का दावेदार होता है, दुनिया उसे दूबे बनाकर ही छोड़ती है!

अब आप ही बताइए दुनिया से निबटा कैसे जाए? दुनिया के कहे पर झाड़ पर चढ़ा जाए या फिर झाड़ के नीचे बैठ के दुनिया देखी जाए?

4 comments:

गिरीन्द्र नाथ झा said...

chaliya janab aapka blog aakhir aaj mil hi gya....kaphi dino se aapko khoj raha tha..
aapko padhta hun aakhbar me, aaj yahan bhi padha..
sukriya aacha likha hai aapne.

विजयशंकर चतुर्वेदी said...

भाई, किसी फिल्मी महाकवि ने कहा है कि दुनिया बड़ी जालिम है, दिल तोड़ के हंसती है.

Udan Tashtari said...

झाड़ के पीछे छिप के दुनिया देखिये-यही जमाना आ गया है. उपर चढ़ने या नीचे बैठकर दुनिया देखने का समय तो कबहु का खत्म हो गया.

-बेहतरीन लिखा.

अनुराग अन्वेषी said...

पिरिएरंजन पाजी (हिंदीवाला नहीं, पंजाबीवाला पा'जी),
सच्चो, गंभीर पाजी (पा'जी) हैं आप। सभे को एके बेर में गरिया दिए। पर इ जो आखरी पैरा में गरिआए हैं, उ किसके दिल का दरद है? कहीं आप केकरो पर तो नहीं कतर रहे या कोई आपका पर तो नहीं कतर रहा?
खैर, अगर कोई हेर-फेर करे तो उसका मुंडी हेरा दीजिएगा। बुझा जाएगा खुदे। का कर रहे हैं अभी? रोटी खा रहे हैं। एकदम सोमालिया से आए हैं का? :)