Thursday, October 05, 2006

कैटरीना की स्कर्ट

लीजिए, खड़ा हो गया एक ठो औरो बवाल! कैटरीना स्कर्ट पहनकर अजमेर शरीफ दरगाह का गई, कट्टरपंथियों ने बवाल मचा दिया। कम कपड़े पर बवाल औरो उहो ऐसन देश में, जहां गरीबों को तन ढंकने के लिए पूरा कपड़ा तक नसीब नहीं होता, हमरी समझ से परे है। माना कि कैटरीना गरीब नहीं है, लेकिन देश में ऐसन करोड़ों गरीब महिला आपको मिल जाएंगी, जिनको टांग क्या, छाती ढंकने के लिए भी कपड़े नसीब नहीं होते। तो का दरगाह जाने का हक उनको नहीं है?

बताइए, ई दुनिया केतना अजीब है! गरीब गरीब बनकर अपने लिए दुआ भी नहीं कर सकता। आपको किसी दरगाह या इबादतखाना में जाना है, तो पहले भीख मांगकर पूरा तन ढंकिए, तब जाकर अपनी गरीबी दूर करने के लिए आप दुआ कर सकते हैं! बहुत बढि़या! गरीब को गरीबी से चिपकाकर रखने का इससे बढि़या फर्मूला धरम के ठेकेदारों को औरो कोयो मिलियो नहीं सकता। वैसे, एक ठो बात बताऊं, ई गरीबो सब न एकदम से बदमाश होते हैं। जबर्दस्ती हमेशा गरीबी से दूर भागने की कोशिश करते रहते हैं। अब जिस अमीरी को भोगने के लिए आप पैदा ही नहीं हुए हैं, उस चीज को पाने की कोशिशे काहे करते हैं? आप तो बस फटे-चिटे बुरके में दरगाह औरो इबादतगाहों में आते रहिए औरो मुश्किल से कमाई अपनी अठन्नी-चवन्नी दान पेटी में गिराते रहिए, ताकि धरम के ठेकेदार रईसी कर सकें औरो आपके लिए इबादतगाहों को महफूज रख सकें। तभिये न आप वहां आकर मत्था टेकेंगे औरो अपनी गरीबी दूर होने की आशा करेंगे।

वैसे, ई रिसर्च वाली बात है कि खुले देह में महिलाओं के इबादतगाहों में जाने से परॉबलम किसको है, भगवान औरो पीर को या फिर धरम के ठेकेदारों को? एक ठो मौलवी साहेब मिले, कहने लगे, 'महिलाओं का पूरा तन ढंककर रखना, धर्मशास्त्रों की शिक्षा है।' लेकिन ऊ ई नहीं बता पाए कि तन ढंका कैसे जाए! तन ढंकने के लिए कपड़ा चाहिए औरो कपड़ा आता पैसे से है। जब पैसा होगा ही नहीं, तो तन कहां से ढंका जाएगा? जब आप महिलाओं को पढ़ने-लिखने नहीं देंगे, उनको बाहर की दुनिया देखने नहीं देंगे, नौकरी-चाकरी नहीं करने देंगे, तो पैसा आएगा कहां से? ऊपर से तुर्रा ई कि आप फैमिली पलानिंग भी नहीं कराने देते हैं। घर का अकेला मर्द दर्जन के हिसाब से बच्चा तो पैदा कर सकता है, लेकिन सबका तन नहीं ढंक सकता। औरो जब बच्चे उघाड़ देह घूमेंगे, तो मांएं अपने तन पर कपडे़ कहां से लाएंगी?

सो, जब आप महिलाओं को एतने सारे बंधनों में बांधकर रखते हैं, तो फिर पीर-फकीर या भगवान के पास कम कपड़ों में जाने से उनको काहे रोकते हैं? रोकना ही है, तो अपने मन को रोकिए। श्रद्धालुओं औरो भक्तों के पैसों से खुद स्वर्ग का सुख भोगने के बजाए, अगर आपने दरगाह के बाहर ऐसी महिलाओं के लिए बुर्के की मुफ्त व्यवस्था की होती, जिनके पास कपड़े नहीं हैं या कम हैं, तो कैटरीनो आपसे मांगा हुआ बुर्का पहनकर चादर चढ़ाने जाती। फिर न आप दुखी हुए होते औरो नहिए आपका धरमशास्त्र। वैसे, महिलाओं को एतने सारे बंधनों में बांधकर रखना आपकी मजबूरियो है। का है कि आप कभियो उदार हो नहीं सकते औरो बिना बंधनों के आप महिलाओं को कैटरीना बनने से रोक भी नहीं सकते।

बहरहाल, अपना सिर धुनने और चिढ़ने से बचने के लिए आपका रचा बंधनों का यह संसार आपके लिए कारगर तो है, लेकिन का आपको ई पता है कि ईरानी मूल की एक मुस्लिम महिला महज हवाखोरी के लिए अंतरिक्ष गई थी?

7 comments:

DR PRABHAT TANDON said...

वाह भाई वाह मजा आ गया। अच्छी टाँग घसीटी है कटटरपथियों की।

Udan Tashtari said...

बहुत सही दिये हो, देते रहो ऎसे ही तीर...शायद कहीं कुछ कर दिखाये. :)

संजय बेंगाणी said...

सही लिखे हो बाबू, ऐसन लिखते रहो...

प्रियंकर said...

ई जटिल 'बिसय' पर बिना नरभसाए बहुतै 'लभ्ली'लिखे हैं पण्डित प्रियरंजन झा.

इदन्नम्म said...

कटटरपथियों की अच्छी टाँग खिची है रजंन भाई।

Anonymous said...

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Anonymous said...

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