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प्यार के साइड एफेक्ट भी तो देखिए!

वैलंटाइन डे शुभ-शुभ बीत गया। मां-बापों ने राहत की सांस ली कि सड़क पर उनका तमाशा निकलने से बच गया, तो पुलिस और प्रशासन ने इसलिए राहत महसूस की कि बजरंगी बदमाशी नहीं कर पाए। हालांकि अपने बजरंगी भाई सब वैलंटाइन डे पर प्यार-मोहब्बत के प्रदर्शन का विरोध तो करते हैं, लेकिन हमारे खयाल से उनको ऐसा नहीं करना चाहिए। ऊ भूल रहे हैं कि ऊ एक ऐसन ताकत का विरोध कर रहे हैं, जिसका ऊ जबर्दस्त फायदा उठा सकते हैं। का है कि प्यार भले ही पनपता स्कूल-कालेजों, मोहल्लों और आफिसों में है, लेकिन पलता औरो परवान तो चढ़ता आबादी से दूर खेत-खिलहानों, बाग-बगीचों, महलों- मकबरों के खंडहरों में ही है न। तो बात ई है कि पेड़-पौधे बढ़े औरो महलों व मकबरों के खंडहर कायम रहे, इसकी दुआ ऊ हमेशा करते रहते हैं। आप का समझते हैं कि मक्का-बाजरे के खेत तमाम मौसमी गड़बडि़यों के बावजूद दो-तीन महीने में अपने-आप लहलहा उठते हैं औरो सरकार की उपेक्षा के बावजूद चौंदहवी -पंद्रहवीं सदी के महल-मकबरे अब तक अपने दम पर महफूज हैं? अरे भैय्या, सब परेमियों के दुआओं का असर है! बजरंगी झाडि़यों और खंडहरों से लैला-मजनुओं को पकड़ने का अभियान तो चलाते हैं, ले...