Friday, February 16, 2007

प्यार के साइड एफेक्ट भी तो देखिए!

वैलंटाइन डे शुभ-शुभ बीत गया। मां-बापों ने राहत की सांस ली कि सड़क पर उनका तमाशा निकलने से बच गया, तो पुलिस और प्रशासन ने इसलिए राहत महसूस की कि बजरंगी बदमाशी नहीं कर पाए। हालांकि अपने बजरंगी भाई सब वैलंटाइन डे पर प्यार-मोहब्बत के प्रदर्शन का विरोध तो करते हैं, लेकिन हमारे खयाल से उनको ऐसा नहीं करना चाहिए। ऊ भूल रहे हैं कि ऊ एक ऐसन ताकत का विरोध कर रहे हैं, जिसका ऊ जबर्दस्त फायदा उठा सकते हैं।

का है कि प्यार भले ही पनपता स्कूल-कालेजों, मोहल्लों और आफिसों में है, लेकिन पलता औरो परवान तो चढ़ता आबादी से दूर खेत-खिलहानों, बाग-बगीचों, महलों- मकबरों के खंडहरों में ही है न। तो बात ई है कि पेड़-पौधे बढ़े औरो महलों व मकबरों के खंडहर कायम रहे, इसकी दुआ ऊ हमेशा करते रहते हैं। आप का समझते हैं कि मक्का-बाजरे के खेत तमाम मौसमी गड़बडि़यों के बावजूद दो-तीन महीने में अपने-आप लहलहा उठते हैं औरो सरकार की उपेक्षा के बावजूद चौंदहवी -पंद्रहवीं सदी के महल-मकबरे अब तक अपने दम पर महफूज हैं? अरे भैय्या, सब परेमियों के दुआओं का असर है!

बजरंगी झाडि़यों और खंडहरों से लैला-मजनुओं को पकड़ने का अभियान तो चलाते हैं, लेकिन ऊ ई भूल जाते हैं कि अगर दिल्ली में पुराना किला, कुतुब मीनार, सफदरजंग मकबरा जैसन इमारतें औरो लोधी गार्डन व बुद्धा गार्डन जैसन पार्क नहीं होते, तो दिल्ली में लव का आधा से बेसी मामला मैरिज तक पहुंचबे नहीं करता! अरे बजरंगी भैय्या लोग, ई तो देखो कि इस झाड़ी औरो किला के प्यार ने तुम्हरे यहां के दहेज औरो जाति व्यवस्था पर कैसन चोट किया है कि ऊ जमीन सूंघने लगे हैं।

तो भैय्या ऐसन है कि परेमियों के परेम-परदरशन पर रोक लगाने से बेहतर होगा कि आप देश के इन दो बड़े संसाधनों (प्यार औरो युवाओं) का दोहन कीजिए। अपनी टोली में लैला-मजनुओं को शामिल कीजिए औरो देश के परयावरण औरो ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में इनकी मदद लीजिए। जैसने बच्चा सब के मन में 'अपोजिट' को देख के कुछ-कुछ होने लगे, उसको लोदी गार्डन में एक ठो पेड़ लगाने औरो उसकी देखभाल की जिम्मेदारी दे दीजिए। जब तक ऊ डेट पर जाने लायक होगा, गुटर-गूं के लिए उनकी अपनी झाड़ तैयार हो जाएगी! बताइए, परयावरण का परयावरण बच गया औरो ऊ आपने देश के एक व्यक्ति को बढि़या नागरिको बन दिया। इसका पुण्य भी आप ही को मिलेगा ना!

फिर ई सोचिए न कि परेमी हैं, तो भूत-परेत औरो अपराध का खौफ भी शहर से दूर है। जिस दिन इश्क का कीड़ा काटना बंद कर देगा, परेमी लोग इजहारे-इश्क के लिए एकांत को ढूंढना बंद कर देंगे, यानी खंडहरों में भूतों का बसेरा हो जाएगा। दूसरे ही दिन वहां गंजहों की धुनी रम जाएगी औरो ऊ बदमाशों का अड्डा बन जाएगा।

इसका एक ठो औरो लाभ आपको जानना चाहिए। का है कि प्यार का सीधा संबंध व्यापार से है। प्यार बढ़ेगा, तो व्यापार बढ़ेगा। आपकी पार्टी के व्यापारी लोग आपको ई गणित बढि़या से बता सकते हैं। टीवी देखिए, विज्ञापनों को देखकर आप भी महसूस करेंगे कि देश की सबसे बड़ी समस्या मुंह व तन की दुर्गंध औरो मन की थकान है। लगता है जैसे ये चीजें अगर किसी में हों, तो उसको कभियो वैलंटाइन नहीं मिलेगा--परेम पर ई दुर्गंध औरो थकान भारी पड़ जाता है! मतलब वैलंटाइन पाने के चक्कर में डियोडरेंट से लेकर साबुन, क्रीम, पाउडर औरो शैंपू तक का व्यापार चमक रहा है। अब बाजार के सामने तो वामपंथियो नतमस्तक हैं, फिर आप काहे नाराज रहते हैं भैय्या! आप तो हमेशा से उनके सबसे बड़े हितैषी रहे हैं!

3 comments:

प्रियंकर said...

ई बजरंगी लोगजन सब इहै समझ लेगा त एतना खुराफ़ातै काहे करेगा . बहुतै मुसकिल काम है ई सब लोगजन को प्रेम-प्यार यानी 'लभ' अउर जवानी का सामाजिक और राजनैतिक उपजोग बुझाना.

Shrish said...

वाह भैया बड़े फायदे बताए आप ने तो प्यार के। अच्छा शोध किया लगता है इस विषय पर।

Udan Tashtari said...

हमेशा की तरह-बहुते बढ़िया. जारी रहें.