Thursday, November 16, 2006

सॉफ्ट इमेज की बेबसी

हमको अपने देश औरो अपने में बहुते समानता नजर आती है। अपना देश 'सॉफ्ट नेशन' का 'तमगा' लेकर परेशान है, तो हम 'सॉफ्ट पर्सन' का 'तमगा' लेकर परेशान हूं। हालत ई है कि आए दिन हमको कोयो न कोयो ठोकता -पीटता रहता है, लेकिन हम हूं कि इसी में गर्व महसूस करता हूं। आखिर अपने सॉफ्ट नेशन की तरह हम भी अपना करेक्टर सॉफ्ट पर्सन का जो बनाए रखना चाहता हूं। का है कि आप जिस उपाधि से विभूषित होते हैं, उसकी लाज तो आपको रखनी ही पड़ेगी न, भले ही आपकी हालत कितनी भी खराब काहे न हो जाए!

जैसे अपने देश से इतनी बड़ी आबादी संभले नहीं संभल रही है, वैसने हम से भी हमारा बच्चा सब संभले नहीं संभल रहा। परिणाम ई है कि हमरे पड़ोसियों के पौ बारह हैं औरो ऊ खुराफात कर हमको सताते रहते हैं। उस दिन हमरा पड़ोसी चंचू आ गया। जैसे चीन अरुणाचल परदेश पर अपना अधिकार जता रहा है, वैसने उसने हमारे बारहवें-चौदहवें नंबर के बच्चे पर अपना अधिकार जता दिया। कहने लगा, 'इसको होना तो हमरा बच्चा चाहिए था, लेकिन आपने जबर्दस्ती इसको अपने यहां पैदा कर लिया। देखिए, देखिए... इसकी सूरत, बिल्कुल हमरी तरह है औरो आप हैं कि इसको अपना कह रहे हैं।'

खैर, उस दिन ऊ एक को लेकर तो चला ही गया, लेकिन दूसरे को अभी भी ऊ अपने पड़ोसियों के मार्फत बहकाता है। कमबख्त बच्चा भी बदमाश है, हमसे ज्यादा ऊ अपने को चंचू के करीब पाता है। वैसे, गलती उसकी भी नहीं है, अगर उसकी सूरत देख के हमरा बाकी बच्चा उसे अपना भाई नहीं समझता औरो सौतेला व्यवहार करता है, तो ऊ भला हमसे अपने आपको कैसे जोड़ पाएगा?

इधर चंचू ने एक को कब्जा रखा है, तो उधर दूसरा बच्चा हमरे पड़ोसी चांद साहब के आधे कब्जे में है, बिल्कुल कश्मीर की तरह। उसने भी अपना ईमान-धरम बदल लिया है औरो चांद को अब्बा हूजूर बनाने पर तुला हुआ है। वैसे हम इन दोनों को ठीक तो एक दिन में कर सकता हूं, लेकिन का है कि अपनी 'सॉफ्ट पर्सन' की इमेज पर दाग नहीं लगाना चाहता। ऐसन में उनकी हर बदमाशी पर हम उनको सुधर जाने की चेतावनी देता हूं औरो फिर डरपोक चूहे की तरह अपने बिल में घुस जाता हूं, बिल्कुल अपने देश की तरह। आप ही सोचिए न, अपने देश को अगर उदार लोकतंत्र औरो सॉफ्ट नेशन की अपनी इमेज की चिंता नहीं होती, तो कश्मीर समस्या निबटाने में केतना टाइमे लगता?

पड़ोसिए नहीं, हमरी हालत तो बच्चों ने भी खराब कर रखी है। उस दिन हमरे एक बच्चे ने अपने ही भाई-बहनों पर गाड़ी चढ़ा दी। बावजूद इसके, उसका कहना है कि इसमें उसकी कोयो गलती नहीं है। अगर कोयो फुटपाथ पर खर्राटे भरना चाहेगा, तो उसको सिर पर कफन बांधकर ही सोना चाहिए। चलिए, आज तो हम शराब पीकर गाड़ी चढ़ाए, लेकिन गाड़ी जब रोड पर होती है, तो बिना ड्राइवर के शराब पिए भी वो किसी को ठोकती, तो किसी से ठुकती रहती है। अगर आज मेरे भाई-बहन मेरे गाड़ी के नीचे आकर मरे हैं, तो गलती आप की है। अगर आप उसको घर बनाकर दे नहीं सकते, तो पैदा काहे किए थे? रोड पर कोयो सोएगा, तो मरबे करेगा।

बच्चे की तो बात छोड़िए, हमरे बगीचे के गाछ-पात तक पर हमरा कंटरोल नहीं है। जैसे अपने देश ने बांग्लादेश को जनम दिया औरो अब उसके 'भूतहा' होने पर पछता रहा है, वैसने हम भी अपने कैंपस में एक पेड़ लगाकर पछता रहा हूं। उस कमबख्त को लगाया हमने, लेकिन ऊ एतना 'बड़ा' हो गया है कि फल पड़ोसियों के यहां गिराता है। हमरे यहां उसका केवल सड़ा-गला पत्ता गिरता है, अवैध बांग्लादेशी परवासियों की तरह। जैसे दिल्ली औरो बिहार जैसन राज्य इन परवासियों की चोरी-डकैती से परेशान हैं, वैसने हम भी इस पेड़ के पत्ते की सड़ांध से परेशान हूं, लेकिन कुछ नहीं कर सकता, काहे कि हम अपने साफ्ट पर्सन की इमेज को दाग लगाना नहीं चाहता। अब आप ही बताइए देश के कारण हमरी ये ये दशा हुई है या हमरे कारण देश की।

3 comments:

भुवनेश शर्मा said...

वाह बिहारी बाबू क्या खूब लिखा है

Manish said...

बहुते अच्छा लिखे हो भाया !

अनुराग श्रीवास्तव said...

"वैसे, गलती उसकी भी नहीं है, अगर उसकी सूरत देख के हमरा बाकी बच्चा उसे अपना भाई नहीं समझता औरो सौतेला व्यवहार करता है, तो ऊ भला हमसे अपने आपको कैसे जोड़ पाएगा?"

बहुत सधा हुआ लिखा है! आपने दोनो पक्षों की पीड़ा को उजागर किया है! बधाई!