Thursday, May 31, 2007

राष्ट्रपति की कुर्सी, मंगरू की उम्मीदवारी

देश को एक अदद राष्ट्रपति चाहिए। पूरा देश आजकल उसी की खोज में व्यस्त है, लेकिन एको ठो योग्य उम्मीदवार पर सहमति नहीं बन पा रही। अब जबकि कांग्रेस, बीजेपी से लेकर बसपा तक इस नेशनल टैलेंट हंट शो में जोर आजमाइश कर रहा है, हमको लगता है कि हमरा मंगरू इस पोस्ट के लिए सबसे पकिया उम्मीदवार है। का है कि राष्ट्रपति बनने के लिए अब तक तमाम पार्टियों ने जिस-जिस टैलेंट की बात की है, अपना मंगरू उन सब पर सोलहो आना खरा उतरता है।

मंगरू की सबसे बड़की खासियत ई है कि ऊ सब दिन से दबा कुचला रहा है, इसलिए ऊ बोलता बहुत कम है। ऐसन में राष्ट्रपति बनने के बाद ऊ सरकार या संसद के किसी भी ऊटपटांग हरकत के बारे में कभियो कुछो नहीं बोलेगा, इसकी गरंटी है। सोनिया को 'लाभ का पद' के दायरे से बाहर करने की तो बाते छोड़िए, अगर सरकार देश को बेचने का अध्यादेशो लेके आ जाए, तभियो ऊ कुछो नहीं कहेगा। ऐसने अगर सरकार चाहे, तो ऊ एक नहीं हजारों अफजल गुरु को फांसी की तख्ती से उतार देगा औरो सरकार का वोट बैंक मजबूत करने में पूरा मदद कर करेगा।

उसकी दूसरी खासियत ई है कि ऊ निपट गंवार है, मतलब ई कि ऊ कभियो सरकारी फैसलों पर उंगली नहीं उठाएगा। केंद्र सरकार जब चाहे, तब राज्यों के गैरकांग्रेसी सरकार को धमका सकती है, टपका सकती है, विपक्षियों को संसद से बाहर फिंकवा सकती है औरो यहां तक कि इमरजेंसियो लगवा सकती है... यानी मंगरू के राष्ट्रपति रहते सरकार की फुल ऐश!

उसकी तीसरी खासियत ई है कि भगवान ने उसके पुण्यों को देखते हुए ऐसन जाति में पैदा किया है कि मायावती से लेकर सोनिया गांधी तक उसका विरोध नहीं कर सकती। इस मामले में ऊ सुशील कुमार शिंदे से वजनी उम्मीदवार है। ऊ तो हंडरेड परसेंट से भी अगर बेसी संभव हो, तो आरक्षण का हकदार है। ऐसन में उसके नाम पर किसी को कोयो आपत्ति नहीं होगी।

उसकी चौथी विशेषता ई है कि ऊ राष्ट्रपति चुनाव में लगल सब उम्मीदवार पर किसी न किसी तरह से भारी पड़ता है। ऊ न तो करण सिंह जैसन लोकसभा चुनाव हार चुका है औरो नहिए प्रणव मुखर्जी जैसन जिंदगी में पहली बार लोकसभा चुनाव जीता है। ऊ अर्जुन जैसन समाज को बांटकर सुख पाने वाला मंतरियो नहीं रहा है औरो नहिए ऊ कभियो सुशील कुमार शिंदे जैसन निकम्मा मुख्य मंतरी साबित हुआ है। ऊ शेखावत जैसन संघियो नहीं है कि दूसरे दल के ढोंगी नेता सब उसके नाम पर बिदक जाए औरो वोट न दे।

उसकी पांचवीं औरो सबसे बड़की खासियत ई है कि अगर आप उसको झुकने कहिएगा, तो ऊ लेट जाएगा। सही पूछिए, तो मंगरू की यह खासियत इस पोस्ट के लिए उसको सबसे बेसी योग्य उम्मीदवार बनाता है, काहे कि 'बी' पार्टी के चीफ 'माननीय' से लेकर 'सी' पार्टी की चीफ 'मैडम' तक को इस पोस्ट पर ऐसने व्यक्ति चाहिए, जो देश की चिंता ताक पर रखकर हमेशा उनकी जी हुजूरी करता रहे।

अब इस 5 गुण के अलावा हमरे खयाल से और कोयो ऐसन गुण नहीं है, जो हमरे देश के नेताओं को राष्ट्रपति के किसी उम्मीदवार में चाहिए। औरो जब अपना मंगरू इन तमाम गुणों का धनी है ही, तो भला रायसीना हिल का राष्ट्रपति भवन उससे काहे मरहूम हो!

6 comments:

Udan Tashtari said...

हमें तो मंगरु की उम्मीदवारी बड़ी दमदार लग रही है. लगाये रहो दम!!

Sanjeet Tripathi said...

ये हुई ना कौनो बात, हमरे हाथ के सभई एम एले मंगरू जी को ही वोट देंगे। अउर उ का कहते हैं कोसिस की जाएगी कि सर्वानुमति बनाया जाए।

Raviratlami said...

एकदमे मंगरू जैसा मौलिक व्यंग्य है भाई. धारदार, तीक्ष्ण.

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

ऐसा है जी कि आप लेट हो गये. इससे पहले एक ब्लॉगर कोई मल्लिका सोनी या सेरावाली की उम्मीदवारी का पोस्ट लिख चुके थे और हमने कुशल टिपेरे के रूप में उनसे सहमत होने की हामी भर ली थी. मंगरू को 5 साल बाद केण्डीडेट बनवाइयेगा. अपना सपोर्ट रहेगा :).

अनूप शुक्ला said...

अच्छा लिखा है! लेकिन ज्ञानदत्त जी सपोट नहीं कर रहे हैं! क्या आफत है!

arun said...

कहे भाइ हमारी काट के लिये एतना बडा कदम उठाये लिये हो,चीटी के लिये पहाड जैसा
चलो अब हमारा वोटवा भी मंगलू को