Tuesday, October 16, 2007

बाबा बनने का गुर

उस दिन रमेश जी आए। बहुते हड़बड़ी में थे। बोलने लगे, 'किसी से हमको दस करोड़ टका कर्जा दिला दीजिए, दो साल में हम उसको बीस करोड़ लौटा दूंगा...।'

हमने कहा, 'अरे, असली बतवा तो बताइए? एतना टका शेयर बाजार में लगाइएगा का? हमरी मानिए, अभी ऐसन रिस्क मत लीजिए, शेयर बजार जल्दिये डूबने वाला है। वित्त मंतरी तक कह रहे हैं कि अभी इन्भेस्टमेंट में खतरा है।'

ऊ बोले, 'आप बेकारे नरभसिया रहे हैं। भैय्या, शेयर बाजार में पैसा लगाना के चाहता है? हम तो बाबा बनना चाहता हूं, पैसवा उसी के लिए चाहिए।'

हमने कहा, 'का बात कर रहे हैं! साधु-संत बनना कौनो दुकानदारी थोड़े है कि उसे शुरू करने के लिए पूंजी चाहिए। लोग तो माया-मोह से पिंड छुड़ाने के लिए साधु-संत बनते हैं औरो आप हैं कि साधु बनने के लिए पूंजी...!'

रमेश जी उखड़ गए, उनको लगा जैसे हम उनकी बात बूझने की कोशिशे नहीं कर रहा हूं। ऊ चूड़ा-सत्तू लेकर बैठ गए कि जब तक हम समझूंगा नहीं, ऊ उठेंगे नहीं। बोले, 'देखिए, मुफ्त में आजकल बाबा बनना बहुते मुश्किल है। बढ़िया बाबा बनने के लिए दस करोड़ तो चाहिए ही। दो-तीन करोड़ हमको इसलिए चाहिए, ताकि हम एक ठो फाइवस्टार आश्रम बना सकूं औरो कुछ 'दिखने वाला' सामाजिक काज कर सकूं। बाकी जो सात-आठ करोड़ टका बचेगा, उसको पब्लिसिटी में लगाऊंगा... बड़का नेता, अभिनेता औरो वैज्ञानिकों को खरीदूंगा, जो ई ढिंढोरा पीटेंगे कि आध्यात्मिक सुख तो बस श्री श्री 1008 रमेशानंद जी महाराज के चरणों में ही है। इनकी चरणों में आकर आप ऊ सब पा सकते हैं, जो जिंदगी में आपको चाहिए। आप ही सोचिए न, अगर सुनीता विलियम्स हमरे आसरम में आकर केवल ई कह दे कि हमरे आसरम जैसन सुख उनको अंतरिक्षो में जाकर नहीं मिला था, तो हमरी कैसन धाक जम जाएगी। ऐसने पैसा लेकर दंतमंजन का परचार करने वाले अमिताभ बच्चन को भी हम सेट कर सकता हूं। अगर ऊ मंजन बेच सकते हैं, तो ई काहे नहीं कह सकते कि स्वामी रमेशानंद जी महाराज देवता हैं।'

उनका आइडिया हमको पसंद तो आया, लेकिन हमरे समझ में ई नहीं आया कि अब तक बाबाओं और सत्संग के विरोधी रहे रमेश जी सत्संग में परवचन कैसे देंगे! औरो जब परवचने नहीं देंगे, तो लोगों में उनकी धाक जमेगी कैसे!

रमेश जी ने हमको ऐसे देखा, जैसे हमरी बुद्धि पर उनको तरस आ रही हो। हमको घूरते हुए बोले, 'बीस साल से यहां हम घास थोड़े खोद रहा हूं! आजकल तो भगवान को भी ई साबित करने के लिए मीडिया की जरूरत पड़ती है कि ऊ भगवान हैं। परवचन से बचने के लिए हम मीडिया को सेट करूंगा, एक ठो पी आर एजेंसी रखूंगा। ऊ परोपगंडा करेगा कि रमेशानंद जी महाराज साल में बस एके दिन बोलते हैं औरो ऊहो कान में। मतलब चेला सब को परवचन देने से तो छुट्टी मिलिए जाएगी, साल के उस एक दिन की कमाई भी करोड़ों में हो जाएगी, जिस दिन हम बोलने वाला रहूंगा। भाड़ा पर स्क्रिप्ट लिखने वाला आदमी रखूंगा औरो उसका लिखा परवचन अपनी आवाज में टेप कर साल भर सत्संग में बजाऊंगा। हींग लगे न फिटकरी, रंग चोखा होए।'

खैर, रमेश जी बाबा बन अपनी दुकान चला पाएंगे कि नहीं, ई तो हमको नहीं पता, लेकिन आइडिया उनका टंच है। तो अगर आप चाहते हैं कि दू साल में आपकी रकम दूनी हो जाए, तो रमेश जी में इन्भेस्ट कर सकते हैं।

5 comments:

बाल किशन said...

का बढिया पोस्टवा लिखें है. पढ़ कर दिमगावा का बत्तिया पूरा का पूरा जल गया है. ई धाँसू आइडीवा सरकाया है के बस पढकर मनवा खुश हो गईल बा.

Srijan Shilpi said...

बढ़िया गुर बताए हैं रमेश स्वामी महाराज। बोले तो धांसू।

Udan Tashtari said...

बहुत दिन बाद आये, बहुत बेहतरीन गुर सिखलाये.

विनीत कुमार said...

भाई शुरु-शुरु में इतना बड़ा रिस्क अकेले मत उठाओ, पार्टनरशिप पर काम शुरु करो,ढ़ंग के पार्टनर की कमी नहीं होने दूंगा, एक तो तुम्हें गाहे-बगाहे में ही मिल जाएगा।...और सुनिए सिर्फ ब्लॉग लिखने से काम नहीं चलेगा, नीतीशो बाबू के कान में बात डालिए कि ऐसे-ऐसे सोचे हैं, बाबा लोग के उ ब्रांड एम्बेस्डर बनाते हैं और अगर आप बन गए तो लेडिस की कमी नहीं होगी।...

राकेश said...

विनीत बाबु का आइडिया पर कहिए रमेश बाबु काम करें तो अच्छा रहेगा. काहे कि हमको लगता है कि शुरू शुरू में एतना बड़ा क्रेडिट कौनो देबो नहीं करेगा आउर रिस्क त हइए है. लेकिन जैसन बिहारी बाबु बता रहे हैं ओइसे त इहे लगता है कि रमेश बाबु एक्के बार ब्रह्मांडे कब्जियाना चाह रहे हैं.


आइडिया धांसू है गुरु. रमेश बाबु को हमर सलाह पेटेंट करा लें.
बढिया लिखे!